भोपाल । करवाचौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से स्त्रियों को पति की दीर्घायु, सुख समृद्धि एवं स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। अविवाहित कन्या मनचाहा या श्रेष्ठ वर प्राप्ति के लिए भी इस व्रत को रखती हैं। इस साल यह व्रत रविवार के दिन रोहणी नक्षत्र एवं अपनी उच्च राशि वृषभ में चंद्रदेव के भ्रमण के समय किया जाएगा। करवाचौथ को रोहणी नक्षत्र और उच्च राशि में चंद्रदेव का भ्रमण व्रत करने वाली स्त्रियों के मन को शीतलता देगा।
रविवार को करवाचौथ का व्रत 5 साल बाद पड़ रहा है, इससे पहले 2017 करवाचौथ रविवार की थी। इस दिन शिव-पार्वती, गणेश कार्तिकेय के साथ चंद्रदेव की पूजा का विधान है। रविवार के दिन एवं अपनी उच्च राशि में चंद्रमा के रहते हुए इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
विशेष संयोग
ज्योतिषाचार्य विजय भूषण वेदार्थी के अनुसार करवाचौथ के व्रत में चंद्रमा की विशेष प्रधानता रहती है, चंद्रदेव के उच्च राशि में स्थित रहने से एवं चतुर्थी के दिन भगवान सूर्य का वार रहने से इस व्रत का महत्व अधिक है। इसके साथ ही शाम को प्रदोष बेला के समय मेष लग्न में शश नामक पंच महापुरुष योग भी निष्पत्ति हो रही है। ऐसे विशेष योग में पूजा करने से स्वास्थ्य लाभ, दीर्घायु की प्राप्ति, घर में सुख-शांति एवं राज्यकृपा की प्राप्ति के साथ-साथ आय के साधनों में भी वृद्धि होगी। इस दिन भगवान शिवजी, मां गौरी, गणेश जी एवं कार्तिकेय पूजा के समय सफेद वस्तुओं का अर्पण करना विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। करवा चौथ पर एक ओर जहां सेलिब्रेशन और पार्टी की तैयारियां चल रही हैं वहीं दूसरी ओर पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन भी किया जा रहा है। पंजाबी समाज में जहां महिलाएं भोर में सरगी करती हैं तो वहीं सास उन्हें नई साड़ी और उपहार देती हैंं।