भोपाल. शिवराज मंत्रिमंडल (shivraj cabinet) में ग्वालियर-चंबल (gwalior-chambal) का दबदबा दरअसल सिंधिया को सरकार बनवाने का इनाम और उपचुनाव की जमावट है.इसके ज़रिए भाजपा ने जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की है. 24 में से ग्वालियर चंबल की 16 सीटों पर जातिगत समीकरण जीत में मायने रखेंगे. यही वजह है कि बीजेपी ने शिवराज कैबिनेट विस्तार में ग्वालियर- चंबल में जातिगत कार्ड खेला है.

ग्वालियर चंबल में जातिगत समीकरण
एमपी में जिन 24 सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें सबसे ज़्यादा 16 सीटे ग्वालियर-चंबल में हैं. ये वो इलाका है जहां ठाकुर, ब्राह्मण, कुशवाहा, गुर्जर, दलित और किरार समाज के वोट हैं.इसलिए मंत्रिमंडल में इनमें से हर वर्ग के नेता को जगह दी गयी है. इनमें से गिर्राज दंडोतिया ब्राह्मण समाज, एंदल सिंह कंसाना गुर्जर समाज, सुरेश धाकड़ किरार समाज, ओपीएस भदोरिया ठाकुर समाज, महेंद्र सिंह सिसोदिया ठाकुर समाज, इमरती देवी दलित समाज,प्रद्युम्न सिंह तोमर ठाकुर समाज, भारत सिंह कुशवाहा कुशवाहा समाज से हैं.

जाटव रह गए बाहर
ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के साथ कमलेश जाटव, जसवंत जाटव,रणवीर जाटव भी सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए हैं..ग्वालियर-चंबल में अनुसूचित जाति वर्ग का वर्चस्व होने के बाद भी कमलेश जाटव,जसवंत जाटव, रणवीर जाटव को कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी है. गोहद से रणवीर जाटव दूसरी बार चुनाव जीते हैं. उनके मंत्री बनाए जाने की अटकलें थीं. गोपीलाल जाटव का नाम लगभग तय था,लेकिन राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद उनका नाम कट गया.

ग्वालियर चंबल से 12 मंत्री
बीजेपी ने 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में जातिगत समीकरणों के साथ क्षेत्र को भी ध्यान में रखा है. यही वजह है कि इस क्षेत्र से 12 मंत्रियों को शिवराज कैबिनेट में जगह मिली है. सिंधिया समर्थकों के साथ कांग्रेस से भाजपा में आए एंदल सिंह कंसाना को मंत्री बनाया गया है.ग्वालियर चंबल अंचल में से भाजपा सबसे ज्यादा सीटें जीतने की कोशिश में है.