नई दिल्ली । देश की राजधानी में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार का एक और ऐसा कारनामा सामने आया है जो आम आदमी का दर्द बढ़ा देगा। कोरोना महामारी में जब गरीब दाने-दाने को तरस रहे थे, भूखे पेट पैदल ही घर जाने को मजबूर थे, तब दिल्ली सरकार की लापरवाही और संवेदनहीनता के चलते 80 क्विंटल अनाज में से आधा चूहे और नेवले खा गए, बाकी बचा सड़ गया। यह वह अनाज था जो केन्द्र सरकार ने गरीबों में फ्री बांटने के लिए भेजा था।

कोरोना के कहर की सुगबुगाहट में लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही केन्द्र सरकार ने गरीबों के लिए फ्री में 5 किलो अनाज दिए जाने की घोषणा की थी। ताकि उनके सामने खाने का संकट न खड़ा हो। यह अनाज राज्य सरकारों के माध्यम से गरीब परिवारों को बंटवाया जा रहा है और यह योजना अब भी लागू है। यहां तक कि बिना राशन कार्ड वालों को भी किसी भी एक पहचान पत्र के आधार पर निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने भी बिन कार्ड धारक परिवारों को राशन मुहैया कराने के लिए ई‑कूपन जारी किया है। राशन वितरण के लिए सरकारी स्कूलों को केंद्र बनाकर स्कूल के कर्मचारियों को ही इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पुरानी दिल्ली के मुस्लिमबहुल इलाके हवेली आजम खान में इसी तरह का एक केन्द्र बनाया गया है। इस केन्द्र पर 28 मार्च को राशन तो आया लेकिन अब तक एक बार भी बांटा नहीं गया। यहां पड़ा राशन सड़ रहा है और चूहे-नेवले उस पर हाथ साफ कर रहे हैं। वहीं इस राशन के असली हकदार गरीब ई‑कूपन लेकर इधर-उधर भटकने पर मजबूर हैं।

इस बारे में पूछे जाने पर क्षेत्रीय विधायक प्रह्लाद सिंह साहनी का कहना है कि उनकी जिम्मेदारी राशन मुहैया कराने की थी, जिसे उन्होंने पूरा कर दिया है। राशन बांटने की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है, जिसे स्कूल पूरा नहीं कर रहा है।

पुरानी दिल्ली के हवेली आजम खान क्षेत्र के नगर निगम प्राइमरी स्कूल में 28 मार्च से 16 बोरी चावल और 74 बोरी गेहूं आकर पड़ा हुआ है। इसका कोई पुरसाने हाल नहीं है। यह स्कूल बंद पड़ा हुआ है और यहां का चौकीदार भी नदारद है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्कूल के पास रोज ई‑कूपन लेकर लोगों की लाइन लगती है मगर उन्हें राशन देने के लिए कोई भी नहीं आता है। इस सिलसिले में हवेली आजम खान आरडब्ल्यूए के महासचिव हाजी रईस अहमद का कहना है कि 28 मार्च के दिन इस स्कूल में राशन बंटने के लिए आया है। लेकिन अभी तक यह राशन बांटा नहीं जा सका है। उन्होंने बताया कि स्थानीय विधायक से बार‑बार इस सिलसिले में बात की गई है मगर वह भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन को भी हालात से आगाह किया गया है।

नाज़ वेलफेयर सोसायटी के कोषाध्यक्ष हसनैन अख्तर मंसूरी ने इस मामले की जांच कराने और दोषियों को सख्त सज़ा देने की मांग की है। दिल्ली सरकार के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन से उनके मोबाइल फोन पर बात करने की कोशिश की गई मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है।