कुछ प्रदेशों से शिकायतें आईं कि बिजली कटौती की समस्या बढ़ गई है। खुद रिपोर्टर इससे परेशान हुआ। अगली दफा जैसे ही बिजली आई, उससे बात करने बैठ गया। 

रिपोर्टर: आप इतना क्यों जाती हैं? देखिए राहत इंदौरी जैसे बड़े शायर को बिजली के लिए ट्वीट लिखना पड़ गया। 
बिजली: तब तो हमारा जाना साहित्य के क्षेत्र में बड़ा योगदान हुआ न? 

रिपोर्टर: वो कैसे? 
बिजली: देख नहीं रहे हैं? पहली बार एक शायर ने बिजली के लिए कुछ लिखा है। वरना अक्सर शायर लोग तो टूटे दिल या प्रेमिकाओं पर ही खर्च हो जाते थे। 

रिपोर्टर: ये तो बहाना है। आप बताइए इतनी कटौती क्यों हो रही है? 
बिजली: कटौती के जरिए बिजली विभाग आपको संदेश देना चाहता है, कटौती करिए, बचत करिए। इससे संपत्ति बढ़ेगी। 

रिपोर्टर: इस बात में कोई लॉजिक नहीं है। 
बिजली: अरे, है भई है, बिजली के दाम इतने बढ़े हुए हैं। सोचो जब तक बिजली नहीं रहेगी, उतने समय तक बिल भी तो नहीं बढ़ेगा। 

रिपोर्टर: यहां आम आदमी परेशान है। आप कटौती का कारण नहीं बता पा रही हैं। 
बिजली: आम आदमी के भले के लिए ही जाते हैं। सुना नहीं है, मन चंगा तो कटौती में गंगा। 

रिपोर्टर: वो कठौती होता है, कटौती नहीं। आप जाती हैं तो गंगा नहीं पसीने का झरना बहता है। 
बिजली: अब इसमें मैं क्या कर सकती हूं। धर्म की किताबों तक में लिखा है कि आना-जाना तो लगा ही रहता है। और वैसे भी गलती आप लोगों की है। 

रिपोर्टर: हमारी क्या गलती? 
बिजली: देखो, मैं इकलौता प्रोडक्ट हूं, जिसका बाजार में कभी प्रचार नहीं होता। फिर भी मेरी घर-घर डिमांड होती है। हीरे का एड देखा है, वो दावा करते हैं, 'हीरा है सदा के लिए'। मैंने तो सदा रहने का वादा ही नहीं किया, फिर शिकायत क्यों?