वैदिक ज्योतिष में देव गुरु बृहस्पति को नवग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और उनके गोचर को भी एक महत्वपूर्ण ज्योतिष्य घटना माना जाता है। इन्हें अत्यंत शुभ ग्रह माना जाता है। बृहस्पति हमारे जीवन में उन्नति की राह खोलते हैं। इन्हें ज्ञान, कर्म , धन , पुत्र और विवाह का कारक माना जाता है। इन्हें अध्यात्म का कार्य माना जाता है और इन्हें दार्शनिक का दर्जा भी दिया गया है। यह ज्ञान के दाता है। ऐसा माना जाता है कि देव गुरु बृहस्पति हमारे आध्यात्मिक ज्ञान व हमारी बुद्धि को निर्देशित करते हैं और जिस जातक पर यह प्रसन्न होते हैं, उसे जिंदगी में किसी चीज की कमी नहीं रहती। समाज में खूब यश सम्मान मिलता है।

जिन लोगों की कुंडली में, होरोस्कोप में बृहस्पति यानी जुपिटर का प्रभाव अधिक होता है, उस व्यक्ति का मन धर्म और आध्यात्मिक कार्य में बहुत अधिक लगता है। देव गुरु बृहस्पति कर्क राशि में उच्च के होते हैं और मकर राशि में नीच के होते हैं। धनु और मीन इनकी अपनी राशियां है।

देव गुरु बृहस्पति इस समय शनि की राशि मकर में विराजमान हैं और 6 अप्रैल, मंगलवार के दिन शाम 6:01 पर अपना गोचर करते हुए मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। जो इस अवस्था में 15 सितंबर बुधवार तक रहेंगे और फिर अपनी वक्री गति शुरू करते हुए प्रातः काल 4:22 पर एक बार फिर से मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा। जिसके बाद वो पुनः मार्गी होते हुए उपरांत 20 नवंबर, शनिवार के दिन पूर्वान्ह 11:23 पर मकर से कुंभ राशि में विराजमान होंगे।

6 अप्रैल को देव गुरु बृहस्पति का इस साल का पहला राशि परिवर्तन होगा और उनके अपनी नीच राशि से निकलकर कुंभ राशि में जाने से कई महत्वपूर्ण घटनाएं भी घटित होंगी । देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा। शिक्षा क्षेत्र में कई तब्दीलिया देखने को मिलेंगी। आईटी क्षेत्र में फिर से उछाल आने लगेगा। इस गोचर का हर राशि के जातकों पर किसी न किसी रूप से प्रभाव पड़ेगा।

मेष राशि वालों की जहां परेशानियां कम होंगी, वहीं शुभ कार्यों पर भी खर्च होगा और धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। वैवाहिक सुख में भी बढ़ोतरी होगी। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त हो सकती है। नव विवाहितों को संतान प्राप्ति का योग बन सकता है।

वृषभ राशि में मिलाजुला प्रभाव रहेगाा। इन राशि वालों को स्वास्थ्य संबंधी खासकर पेट से संबंधित कोई दिक्कत हो सकती है। सेहत के प्रति लापरवाही पर तना ठीक नहीं होगा लेकिन नौकरी में तरक्की संभव है। बिजनेस में लाभ हो सकता है।

मिथुन राशि वालों के दांपत्य जीवन में खुशियां आएंगी । प्रमोशन का योग भी बनेगा। धर्म-कर्म के कार्यों में रूचि बढ़ेगी। आय के साधन बढ़ेंगे। विदेश यात्रा का योग बन सकता है।

कर्क राशि वालों को सेहत के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। बिजनेस संबंधी मामलों में सफलता हासिल हो सकती है। आकस्मिक धन लाभ के योग बन सकते हैं। नौकरी में तरक्की मिल सकती है।

सिंह राशि वालों को मांगलिक कार्यों का योग बनेगा। शादी-विवाह तय हो सकता है। उच्चाधिकारियों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य के प्रति सजक रहने की आवश्यकता है।

कन्या राशि वालों की प्रॉपर्टी में इजाफा होगा। गुरु बृहस्पति कन्या राशि के चतुर्थ और सप्तम भाव का स्वामी है और इस साल 6 अप्रैल से 15 सितंबर तक आपके षष्ठम भाव में गोचर कर रहे हैं। ये समय शिक्षा के लिए अच्छा रहेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता मिलेगी। इनकम का कोई नया सोर्स develop हो सकता है।

तुला राशि वालों को हर तरह के कार्यों में सफलता हासिल होगी। प्रेम-प्रसंग की शुरुआत हो सकती है। आय के कई साधन बनेंगे। संतान संबंधी परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है।

वृश्चिक राशि वाले थोड़ा संभल कर रहे हैं अन्यथा मानसिक तनाव का शिकार हो सकते हैं। पैतृक संपत्ति का लाभ मिलेगा। भौतिक सुख मिलेगा। वाहन खरीदने का योग बन सकता है। नौकरी में प्रमोशन व स्थान परिवर्तन संभव है।

धनु राशि वालों का कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ेगा। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त हो सकती है। धर्म व अध्यात्म में रूचि बढ़ेगी।

मकर राशि वालों के खर्चे बढ़ेंगे और इनवेस्टमेंट के लिए समय अनुकूल नहीं होगा। व्यापार में अगर कोई साझेदार है तो उसके साथ थोड़ा विवाद हो सकता है, जिसे टालना बेहतर रहेगा। घर में बुजुर्गों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना होगा।

कुंभ राशि वालों को वाहन बहुत सावधानी से चलाना होगा। बस यही एक इतिहास बरतनी है। बाकी आपके रुके हुए काम बनेंगे और आर्थिक पक्ष भी मजबूत होगा। विद्यार्थियों के लिए भी समय बढ़िया रहेगा। अपनी प्लानिंग को गोपनीय रखें।

मीन राशि देव गुरु बृहस्पति की अपनी राशि है। मीन राशि वाले नया वाहन या मकान खरीद सकते हैं। पद प्रतिष्ठा दोनों बढ़ेगी। लेकिन स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतना ठीक नहीं रहेगा।

जिन राशियों के लिए देव गुरु बृहस्पति का गोचर बहुत शुभ प्रभात नहीं देगा। उन्हें चाहिए कि वह घर में बुजुर्गों का सम्मान करें और बृहस्पतिवार के दिन किसी मंदिर में चने की दाल दान करें और विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें व स्टेशनरी वितरित करने के साथ-साथ पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं।