नई दिल्ली ,भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा यानी जेपी नड्डा ने भाजपा की कमान संभाल ली है। सोमवार को जेपी नड्डा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। आने वाले समय में उनके सामने भाजपा शासित राज्यों में पार्टी को सत्ता में बरकरार रखने और विपक्ष से राज्यों को छीनने की बड़ी चुनौती है। जेपी नड्डा के सामने फिलहाल दिल्ली विधानसभा चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। साल 2020 में होने वाले विधानसभा चुनावों में जेपी नड्डा की असली परीक्षा होगी। हालांकि, उनके नेतृत्व में यूपी में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन कर रखा है।

दरअसल, जेपी नड्डा को ऐसे समय में भाजपा का नेतृत्व करने का अवसर मिला है, जबकि पार्टी को लोकसभा में तो भारी बहुमत मिला, मगर राज्यों में उसे काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनको एक ऐसी पार्टी की कमान मिली है जो दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और केंद्र के साथ 11 राज्यों में अपनी सरकारों के साथ 17 राज्यों में गठबंधन के साथ सत्ता संभाले हैं। जेपी नड्डा को देश के हर हिस्से में और हर बूथ पर मजबूत संगठन के जरिए पार्टी को अपनी पहुंच से दूर राज्यों में भी मुख्य चुनावी लड़ाई में लाना है।

जमीन से शिखर तक: जनसंघ से जनता पार्टी होते हुए 1980 में नए राजनीतिक दल के रूप में उभरी भाजपा ने चार दशकों में जमीन से सत्ता के शिखर का रास्ता तय किया है। अटल और आडवाणी जैसे ने नेताओं के साथ पली बढ़ी भाजपा अब देश की नंबर एक पार्टी बन गई है। नड्डा के पास इन राज्यों में सरकार बरकरार रखने के साथ विपक्षी सत्ता वाले राज्यों में सरकार बनाने की चुनौती होगी। इसी से उनका आकलन होगा।

दिल्ली चुनाव से चुनौती शुरू
नड्डा के सामने सबसे पहले दिल्ली के विधानसभा चुनाव हैं। दिल्ली में भाजपा दो दशक से सत्ता से बाहर है और पिछली बार को वह महज तीन सीटें जीत सकी थी। दिल्ली में जिस तरह से अरविंद केजरीवाल सरकार ने वादों की फेहरिस्त सामने रखी है और जिस तरह से मुफ्त बिजली, पानी का ऐलान किया है, वोटरों को लुभाना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा। मगर जेपी नड्डा कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली चुनाव में प्रचार के लिए बीजेपी पीएम, सीएम से लेकर केंद्रीय मंत्रियों की फौज उतारने वाली है।

इसके बाद जेपी नड्डा के सामने बिहार की चुनौती होगी, जहां जद (यू) के साथ गठबंधन सरकार है। इन दोनों राज्यों में उनकी अग्नि परीक्षा होगी। बिहार के बाद बंगाल की भी बारी है। बंगाल में बीजेपी भले ही पूरी कोशिश कर रही है, मगर जिस तरह से एनआरसी और सीएए को लेकर विरोध देखने को मिल रहे हैं, वहां भी चुनावी राह आसान नहीं है। इसलिए जेपी नड्डा के सामने चुनौतियों की कमी नहीं है।

संगठन के लिहाज से नड्डा को भाजपा के सबसे बड़े दल के विस्तार को और आगे ले जाना होगा। देश के हर बूथ पर पार्टी को पहुंचाना और वहां पर संगठन के जरिए चुनावी जमीन तैयार करना होगा। केंद्र सरकार व विभिन्न राज्यों में अपनी सरकारों के साथ बेहतर समन्वय बनाना चुनौती होगी।