सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुए आतंकी हमले के मामले में कोर्ट ने छह आरोपियों को दोषी करार दिया है और दो को बरी कर दिया है। कोर्ट इस मामले में सजा का एलान आज करेगी। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 की रात आतंकी हमला हुआ था। 31 दिसंबर 2007 की रात जब पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा हुआ था, रामपुर गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था। पहले तो लोगों ने समझा कि नए साल के स्वागत में पटाखे चलाए जा रहे हैं, लेकिन बाद में पता चला कि यह तो आतंकी हमला था। जब तक सीआरपीएफ के जवान जवाबी कार्रवाई करते उनके सात साथी शहीद हो चुके थे। रेलवे क्रासिंग के पास खड़ा एक रिक्शा चालक भी अपनी जान गंवा चुका था। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमले का अलर्ट पहले से था। खुफिया एजेंसियों ने इसकी जानकारी दे रखी थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आतंकियों ने पूरी तैयारी के साथ 31 दिसंबर की रात आतंकी हमला कर दिया। आतंकियों की योजना सीआरपीएफ के आयुद्ध भंडार तक पहुंचने की थी, लेकिन सीआरपीएफ के जवानों की जवाबी कार्रवाई की वजह से उनको पीछे हटना पड़ा और वह भाग खड़े हुए। आतंकी हमले की खबर मिलते ही दिल्ली से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों के फोन घनघनाने लगे। 
पुलिस के आला अधिकारी मुरादाबाद, बरेली और लखनऊ से रामपुर पहुंच गए। इस मामले को लेकर सिविल लाइंस कोतवाली में एक जनवरी को दरोगा ओम प्रकाश शर्मा की तहरीर के आधार पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 307, 332, 302, 3/5 पीडीपीपी एक्ट और तीन विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। मुकदमा अज्ञात में दर्ज किया गया था। मामले की जांच एटीएस और पुलिस को सौंपी गई। एटीएस ने इस मामले में इमरान शहजाद, मोहम्मद फारूख, सबाउद्दीन, मोहम्मद शरीफ, जंग बहादुर खान, मो. कौसर और गुलाब खां को गिरफ्तार किया। फहीम अंसारी का नाम इस मुकदमे में बाद में शामिल किया गया। 


जिला कारागरार ने आरोपियों को रखने के कर दिया था इंकार 
सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर के आरोपियों को जब गिरफ्तार किया गया तो जिला कारागार के अधिकारियों ने उनको यहां से रखने से साफ मना कर दिया था। उनका कहना था कि जिला कारागार में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। ऐसे में इन आतंकियों को यहां रखना सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। इसके बाद आरोपियों को बरेली और लखनऊ की जेल में रखा गया। आरोपियों को हर पेशी पर कड़ी सुरक्षा के बीच बरेली और लखनऊ से यहां लाया जाता था। 


मुकदमे को वापस लेने की भी हुई थी कोशिश 
सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर हुए आतंकी हमले के मुकदमे को वापस लेने की कोशिश भी हुई थी। पिछली सपा सरकार में गृह विभाग की ओर से डीएम-एसपी को पत्र भेजकर यह पूछा गया था कि क्या इस मुकदमे को वापस लिया जा सकता है। इस मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता के साथ उठाया था, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था और कड़ी टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद प्रदेश सरकार बैकफुट पर आ गई थी और मुकदमे को वापस लेने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।