रीवा। पुलिस द्वारा गुंडा एक्ट के तहत की गई कार्रवाई का कारण जानने के लिए परेशान 75 वर्षीय गणनायक तिवारी ने सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। उन्होंने स्वयं पर की गई कार्रवाई का कारण जानना चाहा था। जिस पर पुलिस कई महीने से भटकाने का प्रयास कर रही थी। पहले थाना प्रभारी ने जानकारी देने से इंकार किया फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने भी जानकारी देने में आनाकानी कर दी और कहा गया कि जो जानकारी मांगी जा रही है, उससे पुलिस की गोपनीयता भंग हो जाएगी।
अपीलकर्ता गणनायक प्रसाद तिवारी ने राज्य सूचना आयोग में इसकी अपील की। बीते महीने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इस मामले की सुनवाई हुई। जिसमें राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने एडिशनल एसपी से जानकारी नहीं देने का कारण पूछा तो वहां पर भी यही बताया गया कि गोपनीयता भंग होगी इनके द्वारा मांगी गई जानकारी देने पर। आयुक्त ने एडिशनल एसपी पर नाराजगी जाहिर की थी और कहा था कि वह सूचना का अधिकार अधिनियम का अध्ययन करें और इस तरह का जवाब आगे से नहीं दिया जाए। इसके साथ ही आयुक्त ने लोक सूचना अधिकारी पनवार थाना प्रभारी की व्यक्तिगत सुनवाई आयोग के सामने लगा दी थी।
जहां पर पनवार थाने के प्रभारी जालम सिंह ठाकुर ने राज्य सूचना आयोग के सामने शपथ पत्र में यह कहा है कि अपीलकर्ता गणनायक प्रसाद तिवारी के विरुद्ध गुंडा एक्ट के तहत जो कार्रवाई हुई थी, उसमें पुलिस अधीक्षक की ओर से कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया था। इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी ने व्यक्तिगत द्वेष के चलते यह कार्रवाई की थी।
इसके पहले गणनायक प्रसाद ने कई पुलिस अधिकारियों के सामने आवेदन देकर कहा कि उन्होंने क्षेत्र में मादक पदार्थों की अवैध बिक्री को रोकने और अपराधियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। जिसके चलते आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के साथ मिलकर तत्कालीन थाना प्रभारी ने गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई कर दी थी।
राज्य सूचना आयोग के सामने पुलिस ने पूर्व में तर्क दिया था कि गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई के रजिस्टर में कई गोपनीय सूचनाएं रहती हैं, उसकी फोटोकापी यदि दी गई तो अन्य संबंधित शिकायतकर्ताओं के नाम उजागर होंगे और उन्हें अपराधियों से खतरा होगा। इस पर राज्य सूचना आयुक्त ने कहा है कि जहां पर ऐसी सूचना हो, उसे ढंककर फोटोकापी कराएं और अपीलकर्ता से जुड़ी पूरी जानकारी उसे दी जाए।

गुंडों की सूची पर समीक्षा नहीं करते अधिकारी

पुलिस द्वारा सभी थाना क्षेत्रों में आपराधिक घटनाओं से जुड़े लोगों का नाम गुंडा लिस्ट में दर्ज किया जाता है। नियम है कि इसकी नियमित रूप से समीक्षा की जाए और यह देखा जाए कि पूर्व में जिस व्यक्ति का नाम जुड़ा था, वह अब अपराध से जुड़ा है अथवा नहीं। यदि संबंधित व्यक्ति सामान्य जीवन जी रहा है तो उसका नाम सूची से बाहर किए जाने का भी प्रावधान है। पुलिस अधिकारियों द्वारा इसकी समीक्षा नहीं किए जाने के चलते व्यक्तिगत द्वेष की वजह से आए दिन गुंडा लिस्ट में नाम दर्ज किए जाने की शिकायतें आ रही हैं।

न्यूज़ सोर्स : Good Morning Rewa