रीवा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे मकानों की गुणवत्ता की पोल खुलने लगी है। शहर के सुंदरनगर मोहल्ले में बनाए जा रहे मकानों में आवंटन से पहले ही दरारें आने लगी हैं। पहले भी इन भवनों के गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे, शिकायतें भी नगर निगम आयुक्त से कई बार हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने की वजह से मनमानी निर्माण होता गया और अब भवन की दीवार फटने के निशान दिखने लगे हैं।
यहां पर 394 मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए हैं। 136 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर नगर निगम प्रशासन ने मेहरबानी करते हुए 50 करोड़ रुपए अतिरिक्त दिया है, इसके बावजूद घटिया निर्माण सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ महीने पहले भी जब शुरुआती दौर में निर्माण चल रहा था तब भी बीम में खराबी आई थी, जिसे बाद में सुधारा गया था।
आवास योजना के मकान में दरार आने के चलते कई हितग्राहियों ने उसका मुआयना किया है और कहा है कि यदि इस तरह का मकान दिया जाएगा तो वह नहीं लेंगे, किसी दूसरे स्थान के मकान की मांग करेंगे। मौखिक रूप से निगम के अधिकारियों को भी इस संबंध में सूचित किया जा चुका है। स्थानीय पार्षद सतीश सिंह एवं वार्ड दस के पूर्व पार्षद वीरेन्द्र सिंह भी मकान देखने पहुंचे और कहा है कि जहां पर मकान में दरारें आई हैं, उसे सुधारा जाए। पूर्व पार्षद वीरेन्द्र ने आरोप लगाया कि पूरे शहर में कुछ अधिकारियों ने ठेकेदारों से मिलकर बंदरबांट किया है, इसका खामियाजा यहां पर रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना का सुपरवीजन करने के लिए दो एजेंसियों को नियुक्त किया गया है। प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एण्ड मैनेजमेंट कंसलटेंट(पीडीएमसी) और इजिस नाम की एजेंसियों को निर्माण की गुणवत्ता से लेकर ठेकेदार के भुगतान की फाइल तक तैयार करने का कार्य दिया गया है। दोनों एजेंसियों द्वारा नियुक्त किए गए इंजीनियर भोपाल में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। महीने में एक या दो बार ही आते हैं और भुगतान की फाइल निगम में लगाकर चले जाते हैं। ठेकेदारों और इन एजेंसियों की मिलीभगत के पहले भी आरोप लगते रहे हैं। इसी तरह स्टार्म वाटर प्रोजेक्ट में भी व्यापक रूप से मनमानी की जा रही है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में लगातार आ रही विसंगतियों की शिकायत मुख्यमंत्री कमलनाथ और नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह से की गई है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष अजय मिश्रा बाबा ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि योजना में व्यापक पैमाने पर धांधली की गई है। पूर्व में आयुक्त रहे आरपी सिंह और कार्यपालन यंत्री शैलेन्द्र शुक्ला ने शासन के नियम परिषद को भी नहीं बताए। पहले 20 हजार रुपए जमा कराकर पंजीयन किया जा रहा था और 1.80 लाख किश्तों में देने की बात हुई थी। अब स्लम और नाम स्लम की शर्त जोड़कर 4.75 लाख रुपए हितग्राहियों से मांगे जा रहे हैं। इसी तरह बीएलसी घटक में संपन्न लोगों को लाभ दिया गया है जबकि हितग्राही भटक रहे हैं। ज्ञापन में कई जगह उल्लेख किया गया है कि भाजपा के पक्ष में वोट करने के लिए अधिकारियों ने कर्मचारियों के माध्यम से दबाव बनाने का काम किया है।
ज्ञापन में कलेक्टर गाइड लाइन की अनदेखी किए जाने का भी आरोप लगाते हुए संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। कहा गया है कि 9 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से 30 वर्गमीटर के मकान की कीमत 2.70 लाख रुपए होती है। निगम अधिकारियों ने 8.45 लाख रुपए कीमत निर्धारित कर दी। कलेक्टर गाइड लाइन की अनदेखी की गई है, इससे मकान खरीदने वालों पर आर्थिक भार पहुंचेगा।

न्यूज़ सोर्स : Good Morning Rewa