रीवा। सोलर पॉवर प्लांट में पानी के तेज बहाव के चलते नुकसान हुआ है। प्लांट की दो इकाइयों में नुकसान अधिक हुआ है। जिसकी वजह से बिजली का उत्पादन भी ठप हो गया है। नदी के पानी का बहाव क्षेत्र जहां तक था, उसकी अनदेखी करते हुए कंपनियों ने सोलर पैनल लगा दिए थे। पूर्व में ही इसकी आशंका जताई जा रही थी लेकिन कंपनियों ने अपनी मर्जी के अनुसार कार्य किया और करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया है। बताया गया है कि बदवार पहाड़ की देउदह नदी पहाड़ी पानी पर निर्भर होती है, बड़े हिस्से का पानी यहां पर सिमट कर आता है और कुछ समय के लिए नदी उफान पर होती है। नदी का यह पानी प्लांट में पहुंच गया था।
बारिश के बाद हुई तबाही के चलते दो और तीन नंबर की इकाइयों में 150 मेगावॉट से अधिक बिजली का उत्पादन बंद हो गया है। प्लांट में आई इस तबाही के बाद कंपनियों ने अपने इंजीनियर और कर्मचारियों को लगा दिया है कि जहां भी सोलर पैनल एवं अन्य सामग्री का नुकसान हुआ है, उसका मूल्यांकन करें। बीमा कंपनियों को भी उक्त तबाही दिखाने की तैयारी की जा रही है। सबसे अधिक नुकसान यूनिट क्रमांक तीन एरिंसन क्लीन एनर्जी सोलर में नुकसान हुआ है। इसमें 37 इनर्वटर जल गए हैं। साथ ही तीन सौ से अधिक सोलर पैनल एवं अन्य सामग्री को भी नुकसान पहुंचा है।

पहले भी नदी से हुआ था नुकसान

बीते साल भी देउदह नदी के पानी सोलर पॉवर प्लांट को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद कंपनी के इंजीनियरों ने दावा किया था कि नदी के धार के बाहर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इसके बावजूद नदी के दोनों हिस्सों में सोलर पैनल लगा दिए गए। बीते साल पैनल कम संख्या में लगाए गए थे लेकिन इस वर्ष तीनों कंपनियों द्वारा उत्पादन प्रारंभ कर दिया गया है, इसलिए बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

कंपनियां खुद करेंगी नुकसान की भरपाई

नुकसानी की भरपाई के लिए कंपनियां सरकार से सहयोग मांगने की तैयारी में हैं। वहीं नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के सूत्रों की मानें तो कंपनियों को स्वयं इसकी भरपाई करनी होगी। हालांकि कहा जा रहा है कि प्लांट का बीमा भी कराया गया था, इसलिए उससे नुकसान की भरपाई हो सकती है लेकिन जिस तरह से निरंतर आने वाले खतरे की अनदेखी की गई है, उससे पूरी तरह से सहयोग मिलना मुश्किल हो सकता है।

फेसिंग का करंट भी किया बंद

सामग्री चोरी के डर से कंपनियों ने तार फेसिंग की बाउंड्री बना रखी है। इसमें करंट भी लगाया गया है ताकि कोई भी चोरी के लिए घुसने का प्रयास करे तो उसमें फंस जाए। पानी के बहाव में एक हजार मीटर से अधिक से दूरी की फेसिंग भी टूट गई है। इससे बड़ा खतरा वहां काम कर रहे कर्मचारियों को हो सकता था, इसलिए फिलहाल करंट को बंद कर दिया गया है। अब इंजीनियरों के परीक्षण के बाद ही इस पर निर्णय होगा। वहीं प्लांट परिसर के भीतर निरीक्षण करने एवं कर्मचारियों के जाने के लिए बनाई गई सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है।
बारिश के पानी के कारण सोलर पॉवर प्लांट को नुकसान हुआ है। इससे आंशिक रूप से सभी इकाइयां प्रभावित हुई हैं। तीन नंबर की इकाई का अधिक नुकसान हुआ है। नुकसानी की भरपाई कंपनियों को ही करना है, उनसे कहा गया है कि उत्पादन व्यवस्था फिर चालू कराने का प्रयास करें।
-एसएस गौतम, 
कार्यपालन यंत्री
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा

न्यूज़ सोर्स : Good Morning Rewa