इन्दौर । रात को सोने से पहले अपने मस्तिष्क को पूरी तरह से खाली करना जरूरी है। स्वस्थ शरीर के लिए गहरी नींद भी चाहिए। वर्तमान समय में बहुत कम लोग गहरी और राहतभरी नींद ले पाते हैं। इसका असर अगले पूरे दिन हमारी कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। कितने घंटे की नींद प्रतिदिन हो, इसके बजाय कितनी गहरी नींद आए - इस पर ध्यान देना चाहिए। आठ घंटे सोने के बाद भी यदि उठने पर ताजगी महसूस न हो तो ऐसी नींद का कोई फायदा नहीं। 
सपना-संगीता के पीछे, अशोक नगर स्थित ओशो ग्लीम्पस पर कल शाम को ओशो के देववाणी मेडिटेशन का प्रशिक्षण देते हुए प्रशिक्षक प्रेम गरिमा ने उक्त बातें बताई। यहां प्रतिदिन सांय 7.30 से 8.30 बजे तक ओशो देववाणी मेडिटेशन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रेम गरिमा ने कहा कि अच्छी नींद का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप जब भी बिस्तर पर पहुंचे, रोशनी बंद कर दें और 15 मिनट के लिए आंखें मूंदकर कोई संगीत सुने, दूसरे दौर में ‘ला ला ला’ जैसी कोई भी हल्की आवाज गुनगुनाना शुरू कर दें, तीसरे दौर में खड़े होकर ला ला ला को लगातार कुछ देर दोहराए और अंत मंे रोशनी बंद कर सोना है। इससे आपके मन के अनावश्यक विचार खाली हो जाएंगे और निश्चित ही कुछ ही समय में आप गहरी नींद में जा सकेंगे। इस तरह कम समय में गहरी नींद लेकर सुबह तरोताजा होकर उठ सकेंगे। प्रशिक्षण के दौरान प्रेम गरिमा ने इन सभी प्रयोगों का प्रदर्शन कर इनका व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया। इस दौरान प्राची, अमृता, अनिल, दीपक पाठक, आर.के. भदौरिया, प्रसन्न जैन, रवि जैन सहित 25 लोगों ने इस प्रशिक्षण का लाभ लिया। 
प्रशिक्षक प्रेम गरिमा के अनुसार आंतरिक शांति और तनाव से गहरी राहत तथा अनिंद्रा के शिकार लोगों के लिए यह एक अचूक ध्यान क्रिया है जो ओशो ग्लीम्पस पर पहली बार कराई जा रही है। यहां नादब्रम्ह ध्यानयोग का प्रशिक्षण पहले से ही चल रहा है जिसमें अब तक 300 से अधिक ऐसे छात्र-छात्राएं शामिल हो चुके हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं एवं अन्य स्पर्धाओं में भाग लेने वाले हैं। अब इस ओशो देववाणी मेडिटेशन के लिए भी पंजीयन प्रारंभ हो चुके हैं।