इन्दौर । बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी श्री श्रीकृष्ण बेडेकर एक ऐसे हस्ताक्षर हैं जो कवि, सुलेखकार, पत्रकार एवं लेखक होने के साथ-साथ ईमानदार, कर्मठ और धुन के पक्के हैं। हमने अपने जीवन में इतने समर्पित व्यक्तित्व को नहीं देखा, जो तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने काम को पूरा करते हैं। बेडेकरजी बड़े स्वाभिमानी हैं। साथ ही वे दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। 
यह विचार इंदौर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित श्री श्रीकृष्ण बेडेकर के सम्मान समारोह में विभिन्न वक्ताओं ने व्यक्त किए। इस मौके पर श्रीमती गीता बेडेकर भी मौजूद थीं। श्रीकृष्ण बेडेकर का सम्मान शॉल-श्रीफल एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री अभय छजलानी थे। अध्यक्षता वरिष्ठ अभिभाषक अशोक चितले ने की। इस मौके पर पद्मश्री छजलानी ने कहा कि श्री बेडेकर जो भी काम हाथ में लेते उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। उनकी हिंदी और मराठी भाषा पर गहरी पकड़ है और यही कारण है कि उनकी लेखनी बड़ी धारदार होती है। श्री चितले ने कहा कि मेरा बेडेकर जी से आत्मीय रिश्ता है। वर्षों से मेरा उनका परिचय है, जो बहुत जल्द दोस्ती में बदल गया। उन्होंने जो लेखन किया उसमें उत्कृष्टता होती थी, यही कारण है कि बेडेकर जी द्वारा संपादित दीपावली अंक की चर्चा केवल म.प्र. और महाराष्ट्र में नहीं पूरे देश में होती है। श्री चितले ने आगे कहा कि मुझे खुशी होगी कि श्री बेडेकर अपनी लिखित रचनाओं को एक ग्रंथ का रूप देकर उसका प्रकाशन करें। 
इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि श्री बेडेकर का जन्म तो मुंबई में हुआ, लेकिन उन्होंने अपने जीवन के 65 वर्ष मध्यप्रदेश में गुजारे। वे हिंदी और मराठी भाषा पर समान अधिकार रखते हैं। वे कई तरह के विधाओं में पारंगत हैं और उनकी विद्वता के कायल ख्यात वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोड़कर, डॉ. जयंत नारलीकर, कवि बालकवि बैरागी, ज्ञानपीठ विजेता वी.वी. शिरवाडकर सहित कई विद्वतजन हैं। 
अपने सम्मान के प्रत्युत्तर में श्री बेडेकर ने विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि मेरे रांगोली चित्र, कविताएं, पेंटिंग, गायकी को यहां के साहित्यकारों और कलमकारों ने भरपूर सराहा। इनमें बाबू लाभचंद छजलानी, दत्तात्रय सरमंडल, राहुल बारपुते, गुरुजी विष्णु चिंचालकर आदि हस्तियां शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि एमजी रोड स्थित मराठी मिडिल स्कूल ने देश कई प्रतिभाएं दीं हैं। आज इस ऐतिहासिक धरोहर को जमींदोज कर नया संकुल बनाया जा रहा है, जो पीड़ाजनक है। इसका विरोध सभी बुद्धिजीवियों को करना चाहिए। 
इस अवसर शहर की विभिन्न संस्थाओं की ओर से सूरजमल बोबरा व श्रीमती पुष्पा बोबरा, दीपा तनवीर, मिलिंद दिघे द्वारा भी श्री बेडेकर का शॉल-श्रीफल से सम्मान किया गया। अतिथि स्वागत अरविंद तिवारी और प्रदीप जोशी ने किया। सम्मान पत्र का वाचन एवं आभार प्रदीप जोशी ने माना। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मंजुषा जौहरी ने किया। इस मौके पर प्रो. सरोज कुमार, दिलीप चिंचालकर, अलोक खरे, तनवीर फारूखी, नेताजी मोहिते, राजेंद्र कोपरगांवकर, सुधाकर सिंह, आलोक शर्मा, राजेंद्र गुप्ता सहित कई सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।